
आज के दौर में इंसान की रूहानी और जिस्मानी सेहत जिस बीमारी से सबसे ज़्यादा मुतास्सिर हो रही है, वह है चिंता, तनाव और एंजायटी। यह कोई मामूली वहम नहीं, बल्कि दिमाग़ी और असाबी निज़ाम (Nervous System) की एक गंभीर कमजोरी है, जो इंसान की नींद, भूख, सोच, दिल की धड़कन और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर देती है।
लगातार ज़्यादा सोच-विचार, फिक्र, डर, मायूसी, कारोबार की परेशानी, घरेलू तनाव और गलत खान-पान की वजह से दिमाग़ की हरारत बढ़ जाती है और नसें कमज़ोर हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि इंसान कोघबराहट, बेचैनी, दिल बैठना, पसीना आना, हाथ काँपना, डर, वहम और उदासी जैसी शिकायतें होने लगती हैं।
यूनानी हिकमत के मुताबिक एंजायटी की असल वजह
यूनानी तिब्ब के मुताबिक चिंता और एंजायटी की बुनियादी वजहें ये हैं:
- सौदा और बलग़म की खराबी
- दिल और दिमाग़ की कमजोरी
- रूहानी ताक़त की कमी
- नींद की कमी और ज़्यादा दिमाग़ी मशक्कत
इसीलिए यूनानी हिकमत में इसका इलाज सिर्फ नींद की गोली नहीं, बल्कि
दिमाग़, दिल और असाब (Nerves) को ताक़त देने से किया जाता है।
कुदरती जड़ी-बूटियाँ: बिना साइड इफेक्ट सुकून का इलाज
अल्लाह तआला ने यूनानी और आयुर्वेदिक तिब्ब में ऐसी बेहतरीन कुदरती नेमतें पैदा की हैं, जो बिना किसी नुकसान के दिमाग़ को सुकून और दिल को इत्मिनान अता करती हैं।
एंजायटी में मुफीद जड़ी-बूटियाँ:
- ब्राह्मी (Brahmi)
- जटामांसी (Jatamansi)
- असगंध (Ashwagandha)
- बहीड़ा
- अंजबार
- गुल-ए-बनफ्शा
- खस
- इलायची
- केसर
- गिलोय
खासतौर पर ब्राह्मी और जटामांसी दिमाग़ के लिए अकसीर मानी जाती हैं। ये
याददाश्त बढ़ाती हैं, डर और वहम को कम करती हैं और नींद को गहरी व सुकून-भरी बनाती हैं।
जबकि असगंध जिस्म को ताक़त और दिल को हिम्मत देती है, जिससे इंसान अंदर से मज़बूत महसूस करता है।
आज़मूदा यूनानी नुस्खा (Anxiety Home Remedy)
सामग्री:
- ब्राह्मी पाउडर
- असगंध पाउडर
- जटामांसी पाउडर
(तीनों बराबर मात्रा में)
तरीक़ा इस्तेमाल:
रोज़ सुबह और शाम आधा-आधा चम्मच
गुनगुने दूध या शहद के साथ लें।
फ़ायदे:
- दिमाग़ को ठंडक
- दिल को राहत
- नसों को ताक़त
- घबराहट, डर और बेचैनी में धीरे-धीरे कमी
कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है, इंशा-अल्लाह।
दिल और दिमाग़ को ठंडा रखने वाला आसान नुस्खा
- गुलकंद
- सौंफ
- मिश्री
इनका नियमित सेवन दिल और दिमाग़ की गर्मी को कम करता है,
चिड़चिड़ापन और गुस्सा घटाता है और अंदरूनी सुकून पैदा करता है।
याद रखिए, चिंता और एंजायटी सिर्फ दवा से नहीं जाती, बल्कि
परहेज़, सही सोच और रूहानी सुकून से भी दूर होती है।
इन चीज़ों से बचें:
- देर रात जागना
- मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल
- चाय-कॉफी की अधिकता
- नशा
- फास्ट फूड और ज़्यादा तली चीज़ें
इन आदतों को अपनाएँ:
- सुबह की ताज़ा हवा में सैर
- हल्की कसरत
- कुरआन की तिलावत और ज़िक्र
- अल्लाह की याद
- कुदरत के करीब रहना
यूनानी हिकमत का उसूल है:
पहले परहेज़ → फिर ग़िज़ा → फिर दवा
जो इंसान अपने खान-पान और सोच को सुधार लेता है, वह बड़ी दवाओं के बिना भी सेहत पा लेता है।
नतीजा (Conclusion)
अगर यूनानी हिकमत के उसूलों के मुताबिक सही परहेज़, सही ग़िज़ा और कुदरती जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाए, तो इंशा-अल्लाह
चिंता, तनाव, घबराहट और एंजायटी जड़ से कमज़ोर होकर खत्म होने लगती है।
कुदरती दवाएँ अल्लाह की वह रहमत हैं जो बिना नुकसान के शिफा अता करती हैं
बस ज़रूरत है सही पहचान, सही इस्तेमाल और सही परहेज़ की।